🎋 होइ लय सबकिछु पकैए !
भरि ऋतु हरिअर रहिए क'
भ' सकैए योग्य,अन्न बनै लय
पकैए धान।
बड़ी काल हरिअर कारी होइत
कड़ा आँच पर भुजाइत
अछि,अपन कड़ा
खोंइंँचा छुटबैए तखन होइए
मखान।
बासन मात्र थीक कोनोपोथी,
चाउर-गहुमक बर्तने जकाँ अक्षर
रखबाक यावत धरि से शब्द,भाषा
मे बनि नहि जाइत अछि सिद्धांत
आ ज्ञान।
ई समस्तद्वेष-क्लेश,लोक विभेदी
दुष्ट बुद्धि, समाज राजनीतिक
प्रपंच,प्राणि मात्रक संकट-शोषण
ओ युद्धे युद्ध,भरि विश्व
प्रकृतिक प्रहार संँ मंद नष्ट होइत
जा रहल
चेतना रहय। परस्पर संगी भाव सँ
सहज रहय ई बोध जे देश आ
पृथ्वी पर सर्वोपरि अछि मनुष्यक
अभिमान।
ऐ समय मे क'ल सँ नहिं रहैए,
अउनाइत जीवन ल' क चलितहिं
रहै लय
विकल रहैए प्रान।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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