|🏣| मालिक यौ !
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अहाँक सब किछु एम्हर-ओम्हर
अछि यौ मालिक
ध्यानो जानि न कत' कोम्हर अछि
यौ मालिक।
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एहनो तरहक विकट काल मे कत
छियै अपने
अनको किछु चिन्ता अछि की अगर
अछि यौ मालिक।
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महानगर सबकें इन्द्रासन बना
लेलहुंँ मानल
बाँकी ठाँ तँ एखनो नर्क नगर अछि
यौ मालिक।
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जाड़े छटपट कोना काटलक राति
गरिब गुरबा
अछि बूझल जे कते लोक बेघर
अछि यौ मालिक।
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झलकैए तँ सब किछु वैश्विक
अहाँक व्यवस्था मे
सुन्न होइत गाम दुखितो लोक मगर
अछि यौ मालिक।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
(पुनः देल गेल पोस्ट)
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