सँस्कृतिक दलान

                संस्कृतिक दलान

भाषा संस्कृतिक सर्वोत्तम व्यवहार थीक।       संस्कृतिक दलान पर जतेक बेसी अनठीयाक आबाजाही रहैत छैक ततेक पनगै छैक। नव पल्लवित होइत छैक। यत' -यत' संँस्कृति कें बेसी दिन जन्मौटी नेना जकाँ नजरि-गुजरि संँ बंँचबै लय जतेक काजर-ठोप क', कोरा मे सुरक्षित राखल गेलैक ओत' ओत' संस्कृति बेसी दिन कोनो विशिष्ट नदी जकाँ नहिं रहलै। पहिने पोखरि, फेर कालान्तरमे पानि-कादोक डबड़ा भ' गेलै।                                                        समुद्र संस्कृतिक स्वभाव नहिं भ' सकैए।

                 गंगेश गुंजन                                      #उचितवक्ताडेस्क।

टिप्पणियाँ