। ग़ज़ल सन।
🍀
बड़ अलबेला ई दुनिया। अद्भुत खेला ई दुनिया।।
*
भव्य भवन पसरल नगरक। उपटल मेला ई दुनिया।।
* भरि जन्मक संजोगल सब। एक अधेला ई दुनिया।।
* घेंटकट,भलमानुष बस्तीक। चरफर चेला ई दुनिया।।
* विज्ञानक पसरलए प्रकाश। धर्म धकेला ई दुनिया।।
* गुरुजन-मातु-पिता कहलनि। ठेलम ठेला ई दुनिया।।
* किछु तं युक्ति हेतै बदलक। भने झमेला ई दुनिया।।
☘️
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क। ( पुनर्प्रेषित पोस्ट)
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें