केहन अमीन ओ

           केहन अमीन ओ 

जाहि अमीन कें ब्रह्माण्डक रक़बा नापल- बूझल छनि, किन्तु हमर एक रतीक हृदयक आकार आन्दोलन नहिं नापल पार लगैत छनि ?

एकर भूगोलक कनिको मात्सर्य नहिं छनि। भगवान् कहबै छथि !

                 गंगेश गुंजन                                 #उचितवक्ताडेस्क।२९.मई,२०२३.


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