जिजीविषा क गीत

            जिजीविषाक गायन !

टकुरी - चरखाक बाङ्ग केँ तूमल जाइत छै तोसक- तकियाक तूर केँ धूनल जाइत छै।

ढेकी आ उक्खरि मे धान केँ कूटल जाइछ जाँत-सिलौट पर चिक्कस-चटनी पीसल   जाइछ

सब टा जीयक आनन्दक आरामक सामिग्री मनुखक जीहेक स्वादक थिक महाविष्कार।

भरिपृथ्वीमनुष्यसँ बढ़िअछि कोनकलाकार  

                     🌿🌿

                  गंगेश गुंजन                                #उचितवक्ताडेस्क।१जून,२०२३.

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