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भोथ भ' गेलय भाषा-बोध !
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भोथ दबिला सँ एक टा कुसियार तँ कटायत नहिं आ चललौंहें बाँस काटऽ ?
हृदयहीन भाषा साधारण लोकक घाम- पसेना कहै मे ऊब डूब करऽ लगैए, मनुष्यक प्रेम आ महाकरुणा एकरा कत' सँ ऊघल हेतै जे कहि सकत ?
वर्तमान विश्वक जटिल मानवीय संकट कें लोक द्वारा बुझि सकबा योग्य कहि सकबा मे भाषा,अनमन ओहिना भ' गेलय जेना कोनो दलान वा सड़कक कात मे ओंघराएल पड़ल टूटल तङ्गा-पहियाक बैलगाड़ी हो !
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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