बात बेसी ने कम होइ छै : ग़ज़लसन

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                । ग़ज़लसन।
  बात बेसी ने कम होइ छै
  कहै कहैक अपन दम होइ छै।

  बोल स्नेहो सँ उचरल हरदम
  ज़रूरी नहि जे नरम होइ छै।

  लोक लोकक संबंधो निबहब
  कठिन जँ आपसमे भ्रम होइ छै।

  तय ई नेत करैए उद्देश्य
  कर्म छै कोन कुकर्म होइ छै।

  बड़े गुमान छनलि संबन्धक
  एक क्षण मे सब खतम होइ छै।

  स्नेह,संगीत आ प्रतिरोधहुं मे
  वैह अमृत पल जे,सम होइ छै।

  बिहुंँसि रहल छथि मेंहीं गुंजन
  कतहु मरण एत' जन्म होइ छै।
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  गंगेश गुंजन,२७.५.'२३.                       #उचितवक्ताडेस्क।


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