❄️ ग़ज़ल सन ❄️
ई समाज संसार सदा एहने रहलय बूझल छल
तोंहूँ भ' गेलें ताही मे ओहने तोंहूँ मीता।
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सब दिन तँ कोनो ने कोनो लाथे ठकलकय बहुतो
एते दूर आबि जीवन मे आब की तोंहूंँ मीता।
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बड़ गौरव मिथिला कें भरि समाज मे सीते सीता
आखिर तऽ ओही माटिक महिमा छें तोंहूँ मीता। .
बड़ अथाह अधलाह समय सऽ जा रहलय ई जीवन
एहने असह ताप रौदा मे तँ नै छें तोहूँ मीता।
बड़े मीठ लगइत अछि सूर्यक स्त्री-नाम सविता सन
सैह प्रेरणा, ऊर्जा कविता मे तोहूँ मीता। ..
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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