कोरोना कालक बुलेटिन !

🌿🌿🌿   कोरोना बुलेटिन   🌿🌿🌿    

               कोरोना आ देवलोक                                                   

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पृथ्वी पर मचल कोरोनाक तबाहीक समाचार कहिया धरि रोकल जा सकैत छलैक से हाले मे ईश्वरक संसद में सेहो पहुँचि गेलै। जेना राज्य सरकारक समाचार केंद्र सरकार पहुँचैत छैक तहिना।आब तँ अफरा तफरी मचि गेलै। लोकतंत्रात्मक युग मे भगवान् सेहो तं स्वर्गक अपन यैह प्रणाली स्वीकारि लेलनिहें। सुभीता में छथि। सभ टा देवताक  अपन-अपन विभाग वैह छनि। सर्वोच्च सदनक रूप मे व्यवस्थित।चैन छनि। 


लोको ततेक बढ़ि गलैये जे आब भगवानक अलौकिक शक्ति जनसाधारण में देखार ने भ’ जाइन तें तँ पृथ्वीएक बहुमतीय शासन प्रणाली अर्थात् लोकतंत्रहि कें लागू कयलनिहें। आब झंझटो ने जे ककरो खुरपी हेरा गेल तँ महादेव तकैत फिरतु। केकरो बलजोरी ज़मीन केबाला कयल दस्ताबेज हेरा गेल तँ भगवान अपन गण सभ कें दौरबैत रहू। कारण जे भरि गाम ल' क' सत्यनारायण पूजाक कबुला पाँती भ’ चुकल छनि।


       कोरोनाक ऐ विकट समस्या पर पर्याप्त बौद्धिक घमर्थनक भेल। पश्चात भगवान् लोकनिक मंत्री परिषद् मे सर्वानुमति सं पारित भेल जे आब कोनो तरहक प्रतीक्षा नहि कयल जाय।नै सुनि रहलय तं तुरंत कोरोना कें समुद्र जकाँ पीबी लेबाक व्यवस्था कयल जाय। सैह उपयुक्त विचार सर्वानुमति सं पारित भेल। पारित तं भेल।


मुदा कोरोना पीबथि के ? कोरोना पीबाक  ई भार लेथि के? 


सभा गुम्म भेलि बैसलि। एहना परिस्थिति में जेना कि होइत आबि रहल छैक,सभ भगवान एक दोसराक मुंह देखैत वा आन-आन दिस देख’ लागल रहथि।एम्हर मुख्य भगवान् बेचारे प्रतीक्षा करैत जे क्यो तँ सोझाँ आबथु आ एकर उत्तरदायित्व लेथि। परंतु कथी लय कोनो भगवान् क्यो किछु बजताह। तखन चिंता सँ मुख्य भगवान ब्याकुल भ’ गेलाह। क्षोभ सं बाज' लगलाह-


'ई तँ विचित्र बात।अपने भगवान रहबा लेल पृथ्वीक लोक के हमरा लोकनि भरोस देने रहैत छियैक जे विपत्ति काल हम सभक  रक्षा करब। आइ जखन मनुक्ख अपने लाचार भ’ गेलय तैयो हमरा लोकनि ओकर  रक्षा नहिं करियैक ई तँ घोर पाप नहिं हयत हमरा लोकनि कें ?कहै जाउ तं !


'-पाप कथिक ?' हम देवता थिकहुँ। हमरा लोकनि पाप-पुण्यक योनिक प्राणि नहीं थिकहुँ।' एक टा राजमंत्री टाईप कोनो भगवान् गर्वोक्ति में आपत्ति करैत रोष सं कयलथिन। ऐ पर तं मुख्य भगवान् स्वयं अवाक् रहि गेलाह। कहू तँ ई उचित अछि ? कि तावत हुनका जेना किछु ध्यान अयलनि। अकस्मात पुछलथिन-महादेव के नै देखि रहल छियनि? हुनका खबरि नहीं देल गेलनि की ?'


-देल गेल रहनि।ओ कहलथिन आबि रहल छी पाछाँ पाछाँ।रमि गेल हेताह बाटे में। हुनका कोन?' कि तखनहि अकस्मात् ब्याकुल होइत सरस्वती जी उठलीह आ कनी उच्चे स्वर मे कहलथिन -


'नहिं-नहिं। हुनका नै बजाओल जाय।'


'से किएक ?' कोनो देवता प्रश्न कयलथिन।


जो कारण जे समुद्रे मन्थन काल जकाँ फेरो सब गोटयक यैह स्वार्थी लक्षण देखि क’ विष पान जकां फेर ई कोरोनो विष पीबि लेताह। विचित्र बात।आखिर ई जनिक विभाग छनि से प्रबन्ध करथु। कृपा क’ क’ एहू बेर इहो बिक्ख शंकरे जी कें नहिं पियबै जैअनु। हम नेहोरा करैत छी।सभ गोटयकें।'


सरस्वतीक ई चेतौनी सुनि क’ भगवानक मंत्री परिषद् लज्जित आ स्तब्ध भ' गेल। 


तकरा आगाँ की निर्णय भेलैक से समाद एखन धरि पृथ्वी पर नहिं अयलैए।


ओना इहो खबरि आबि रहल छैक जे भगवान प्रमुखो अपना मंत्री मंडलक ऐ व्यवहार सं क्षुब्ध आ असहाय भ’ क’ मंत्रिपरिषदक परामर्श पर प्रस्ताव पारित कयलनिहें आ निर्णय कयलनिहें जे ओहनहुं मनुष्य आब अपने बेस सक्षम भ' गेलय।


तें आब, कोरोना फाइल एतहि बंदे क' देल जाय आ मर्त्यलोकक सभा कें‌ समाद पठा देल जाय जे मर्त्यलोकक ई अपन समस्या थिकै। अहां लोकनि अपना स्तर पर एकर निराकरणक बंदोबस्त क' लिय'। हं, ईश्वर-मंत्रिमण्डल ई आश्वस्त करैत अछि जे आगां एहि मद मे कोनो हस्तक्षेप नहिं करत। इति,

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गंगेश गुंजन, ०७.०६.'२०.

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                प्रस्तुति :       

                [उचितवक्ता डेस्क]



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