प्रशंसा आ ख़ुशामद

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  आब तँ किनको सुपत प्रशंसा करबा मे पर्यंत तारतम्य भ' जाइत अछि जे शेष समाज कतहु  ख़ुशामद ने बूझय। कथुक प्रत्याशा मे दरबार करब ने बूझि लिअय ! ताहू पर से व्यक्ति यदि कोनो पैघ संस्था वा एनजीओक अध्यक्ष,महासचिव इत्यादि सेहो होइथ तखन तँ अओर मश्किल मे पड़ि जाइत छी।
     ऐ ड'रे, एना तँ किछु यथार्थहु मे विशिष्ट लोकक अपेक्षित सामाजिक सम्मान नहिं भ' पओतनि जकर ओ वास्तव मे अधिकारी छथि ?
   आदर सम्मान प्रगट करबाक कोनो आन बाटक परामर्श द' सकैत छी अपने लोकनि ?
          बड़ उपकार हयत।
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              गंगेश गुंजन                                  #उचितवक्ताडेस्क।

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