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श्रीपीताम्बर झाक टिप्पणी
२९.०७.'२३.
Gangesh Gunjan जी, प्रणाम। हम अपनेकेँ नीक तरह स जनैत छी।अपनेक उपन्यास 'पहिल लोक' हमरा बहुत नीक लागल , किंतु उपन्यास साहित्य मे विशेष महत्व नहि देल गेल। अपने जे पहिल लोक मे लिखने छी,से सत्यक उजागर,किंतु तत्कालीन मैथिली साहित्यकार वा विद्वान के नहि पचलनी,जेना यात्री जी केर पारो।'
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[ ई पोस्ट करबाक आशय :
एहि पाठक कें हमर,लेखकक
सम्मान भाव व्यक्त करब अछि।
गंगेश गुंजन]
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