। 🫂 ।
जहिये सँ माय-बाप कहाय लगला मम्मी-पप्पा
कतहु जड़िमे ओत्तहि लागल अपसंस्कृतियोक भदवा।
आब गुंजैऐ संस्कृति-रक्षा केर विलाप बहु हल्ला
मिथिले नहिं तहिये जँ
भेल रहैत देश साकाँक्ष
बाँचल रहितय घरे आँगन सन
देसीपन,खेत पथार,
मन ने भेल होइत ई मणिपुर
एहन एना अचेत विचार !
बीच विश्व-बजार ।
. गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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