📒 किछु स्वतंत्र दू पँतिया .
ककरो बिनु ककरो नहिं होइ छै किछु बिथूति आब
आइ आओर भ' चुकले माया,सभक स'ब सम्बन्ध।
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हमरा नहिं रहने की कोनो काज रुकल रहलैक
एकहु साँझ रहलै मिझायल भनसा घ'रक चुलहो।
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कानि खीझि क' एखने एक रती आँखि तँ मुनने छल
आसमर्द ऊठल ततेक जे काँचे निन उठि गेल शरीर।
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चैन-मैन कालक कुर्सी मे प्लैटफार्म पर बैसि गेल छी,
रेल जखन आबय आब अप्पन टाईम टेबुले अबैत रहओ।
🍂 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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