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एक रती दुःख भेल छलय, हँ
क्यो जहिया चलि गेल छलय,हँ।
ई नहिं जे सब सुक्खे सुख छल
बेसी चैन ओ संग रहय, हँ।
बन्द रहल बरु मूँहोबज्जी
तृप्त मोन जँ गाम रहय, हँ।
दुपहरियो मे उगय इजोरिया
छिटकल तारा चान रहय, हँ।
ओते दूर आब स्वर नै पहुँचय
यावन्तो जे कथा सहय, हँ।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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