📒। ग़ज़ल सन .
ककरो लय हम कानि रहल छी
ककरो लय हम बाजि रहल छी।
जीवन-युद्ध ठनल जहिये सँ
आयु-अर्थ अंदाजि रहल छी।
चकचक झलकय धवल अर्थलय
कविता-भाषा माँजि रहल छी।
अन्हर मुन्नर खेला रहल हम
लोहा डंटा भाँजि रहल छी।
कतेक दिन सँ कहिया सँ ने,
धोती कुर्ता साजि रहल छी।
पुरुष म'न स्त्रीक नयन अछि
सुन्दर देखय,आँजि रहल छी।
❄️ गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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