चिक्कस, साहित्य आ चोकर !

         चिक्कस,साहित्य आ चोकर !
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  चिक्कस मे तँ चोकर कम रहैत छैक किन्तु साहित्य मे बेसी। एखनुक मैथिली साहित्य-लेखन केँ चालऽ बैसी तँ बेसी चोकरे निकलत।
     ओना आबादीक दृष्टियें सम्प्रति ई तथ्य अनुपातत: भने बहुत बेसी रहओ किन्तु थीक ई साहित्यक प्रायः सबयुगी यथार्थ।
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                  गंगेश गुंजन                                      #उचितवक्ताडेस्क।

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