कोश में शब्द !

                कोश में शब्द ! 
   कुछ शब्दों को सुख-सुविधा ने
 भंग पिला दी थी और वे शब्दकोश
 में बेसुध सोये हुए ख़र्राटे ले रहे थे।
 किसी एक वक़्त में कवि ने उनमें से
 जागृति और आह्वान को
 झकझोर कर जगाया जो क्रान्ति
 और परिवर्तन का साथ देते। 
    कई शब्द हैं जो भंगेड़ी अय्याश की तरह
   शब्दकोश में सोते रहते हैं। 
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                गंगेश गुंजन                                     #उचितवक्ताडेस्क।

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