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चलि जाएब कोनो प्रात,होइत साँझ सकुशल,
घूरि आएब गाम,कहि दी ओ समय नहिं रहल।
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एखन ककरा कहैए के
एत’ ककरा सुनैए के
भरल अछि बाल्टिन मे भाँग
आ सब हाथ मे गिलास।
🌼 गंगेश गुंजन
।#उचितवक्ताडेस्क।
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