🌊🌊। दुलारु समय !
सबहक जीवन मे कहियो कोनो दुलारु समय अबस्से बीतल रहैत छैक।जिनकर जेहनो जीवन रहल होइन।
रुक्ख,खर-खर,गुदड़ी-चेथरी सन बाँचल विरक्त आयुक समय मे ओ दुलारु दिन सब मन पड़ि क’ दुस्सह सँ दुस्सह वर्तमान केँ सेहो कनिक ललितगर कइये दैत छैक। बल्कि से स्मृति कय काल तंँ ऊर्द्धश्वाँस लैत मनुष्य केँ ‘मक्रध्वज’क काज करैत छैक।
🌼 गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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