असंख्य खाम्हक घ'र

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             असंख्य खाम्हक घर !

मैथिली भाषा आ साहित्यमे सब खाम्हे छैक। से खाम्ह अतरे दिने खसैत रहै छैक।पता नहिं मैथिलीक घ’र कतेक टा केहन छैक आ कोन ठाम छैक।
   एतेक खाम्ह वला ओइ विशाल घ’र मे रहै छै के ? साधारण लोक कें बुझलो ने छैक।                       .
    कोनो भाषा साहित्यक एहि संँ बढ़ि क’ विशाल गौरव आर की हेतैक जे ओकर विराट घ'र असंख्य खाम्ह पर ठाढ़ छैक।
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  दूपँतिया.
  चलैत रहत मैथिलीक चास-बास
  बाँचल रहत एकरो सब खास बात?
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               #उचितवक्ताडेस्क।

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