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एखनो रहैये म'न मे सब दिने से रहय
अछि लोक एतेक हमरा सँ नीक जे रहय।
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व्यर्थहुँ कतेक सहलौं हम चाहै नै छल
कथमपि ने आब अनर्गल लोक से सहय।
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कहि तँ रहल छी हमहूँ कय बर्ख सँ बहुत
चाहै छी नव लोक अओर नीक से कहय।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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