• विचारक कोठा •
आब तँ कय टा विचार सेहो ताइ दिनक कुट्टनीक काज करैत लगैए।लोकक दयनीय स्थिति ओ अभाव के सुन्दर आकर्षक बना क’ राताराती कोनो कोठा पर पहुँचा अबैए।
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रहब सरकार भरोसे तँ कतेक दिन जीयब
मनुक्खक देह-मन अछि बऽड़द जकाँ बऽहब।
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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