🌼 आलोचना मे नूरा कुश्ती !
मैथिली आलोचना मे आइए नहिं, हमरो सभक काल मे जबर्दस्त नूरा कुश्ती होइत छलैक।ऐ अखाड़ा मे नीक-नीक प्रतिभा उतरल रहथि। एखनो उतरैत जाइ छथि।
हम आइ धरि एकर कारण नहिं बूझि सकलिऐ। कदाचित ऐ दुआरे तँ नहि जे हमरा बुतें साहित्यहु कें एक टा ‘सत्ता प्रतिष्ठान’ नहि मानल भेल।
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आत्मालोचन
ऐ कुहेस मे कतेक दूर धरि आयल हएब हम
घऽन बाट पर कोन गाछ तर ठाढ़ हएब हम।
|📕| गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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