।। अतीतक पाठ।। फ़रवरी 09, 2024 लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप अतीतक पाठ अतीत कें कानू नहिं। ओकरा गयबो नहिं करू।अतीत केँ स्थिर चित्त सँ देखू।चीन्हू। क्रन्दन कथमपि नहिं होइछ। अतीत संस्मरणक मीमांसा थीक। 📓🌈📓 गंगेश गुंजन। #उचितवक्ताडेस्क। टिप्पणियाँ
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