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किछु तँ भेलैए ककरो
मन नहि लगैए हमरो।
एतेक फीका किएक सब
उदासे लगैए सगरो।
किछु नहिं वा बहुते कम
ढेरी भेलैए तकरो।
ओत’ सुनैत छी रौदी
कतहु पसरलय एम्हरो।
बाट मे छोड़त ओहो
भरोसे किए ओकरो।
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गंगेश गुंजन #उवडे.
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