दुपंतिया :

किछु पाबय लय छोड़ू पहिने जीवन केर तँ 
शर्ते ई,
गाम रही कि भागी अपने पर अछि कोनो महानगर। 
                         ❄️ 
                गंगेश गुंजन #उवडे.

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