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धरिया पर पाग !
किछु व्यक्ति अपन भाषा-संस्कृतिक गौरव प्रदर्शन करैत काल अनमन लगैत छथि जेना कि धरिया पर पाग पहिरने होइथ।
ई दृश्य जीवन मे कोनहुँ एकहि अवसरक भ’ सकैत छैक। कहियो आऽ कखनहुँ नै। सेहो सबजन मैथिल समाज केँ नहिं।
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पथिया मे पानि भरल जाइछ चमत्कार !
जमल रह’ ख़ुशामद धन्य अहा !
ई दरबार।
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
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