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आइ फेसबुक दलान लाइव !
इच्छा होइअय जे आइ साँझ मे सात- आठ बजे सद्य: फेसबुक दलान पर बैसल जाय। अर्थात् फेसबुक लाइव करी।
कहब ज़रूरी नहिं जे हमरो सन एकटा साधारण लेखकक जीवन मैथिली- हिन्दीक यावन्तहु परम आदरेय कवि, लेखक-आलोचकक कतोक दुर्लभ अनन्य रत्न स्मृति सब संँ भरल समृद्ध अछि।
यथाशक्य आचार्य सुमन-आचार्य रमानाथ बाबू जयकान्त बाबू सं ल’ क’ यात्री ललित राजकमल हरिमोहन बाबू मणिपद्म सोमदेव -प्रभास- महाप्रकाश सहित प्रायः समकालीन समस्त लेखकक समृतिसंँ धनीक अपन मन वर्तमान समाज केँ क्रमश: बेरा-बेरी कहिये क’ समर्पित कर’ चाहैत छी।
सभक संस्मरण लिखी से इच्छा रहितहुँ किंचित अलग स्वभावक तेकठाह श्रम संवेदना वला आकाशवाणी सेवाक जीविका निर्वाह ओ रक्षा करैत भरि जीवन अकल्पनीय श्रम ओ संघर्ष रहल। ऐ आयु मे कोनहुँ तरहेँ संभव नहिं भ’ सकल. तकर बहुत अफसोच अछि।
लीखि नहियें कहलहुँ तखन आब नेयारल जे यथासाध्य बाजिये-सुना कऽ किछु करी। इच्छा उत्कट भ’ गेल।
संगहि एहि क्रम मे संगहि अन्यान्य किछु सामयिक साहित्य समाज राजनीतिक चिंता तँ आवश्यक ओ स्वाभाविके रहैत चलि सकैए ।
इच्छा हो तँ आबी #उचितवक्ता फेसबुक दलान’ पर।
आइ सांँझ सात सँ आठ बजे धरि।
आग्रह सहित,
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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