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बैसारी मे
सौभाग्य सँ बहुत गोटय मैथिली लेखक
एखन छी जे क्यो अपन मैथिली-साहित्य
-समयक दुनू विशेष लेखक कें निकटता
सँ,सद्य: देखने, सुनने छी वा कम बेसी
सान्निध्य रहल हयत।
मन पाड़ू आ कहै जाइ जाउ तँ-
अ.
प्रभास जी (कुमार चौधरी) कें अहांँ कहियो चिंतित वा उदास देखने छिऐन ?
ब.
जीवकान्त जी कें कहियो कोनो गीत गबैत सुनने छिऐन ?
💐!💐!
प्रतिक्रिया सादर आमंत्रित।
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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