सोची तँ कष्ट सेहो सब तरहे कष्टे नहि होइत अछि।

 🌴।                                               ।🌴
     सोची तँ कष्ट सेहो सब तरहे कष्टे नहि होइत अछि। 
                        🌼
   कच्ची सड़क पर रेस संँ साइकिल हँकबाक रोमांस की होइ छैक से जे कयने अछि तकरे टा बूझल छैक। 
    बरारी सँ तिलकामांँझी जाइत काल लालकोठी सँ सुन्दरवन,आनन्द गढ़ धरिक बाट ! 
     खांँखी हाफ़पैंट-नील हाफसर्ट,खुजले पयर वला पिंडस्याम छौंड़ाक पक्की छोड़ि क’ कातक सुर्खी वला पतरकी बाट पर हाफ़ पाइड्ल साइकिल चलबैत कालक सुर्र-सुर्र बजैत मेंही मीठ संगीत की होइ छैक से दिव्य स्वाद,चिक्कन कंक्रीटक सड़क पर चलनहार कें कत’ सँ भेटतनि !
     …ओना,विकास इत्यादि अपना जगह पर।
                         गंगेश गुंजन      
                        #उचितवक्ताडे.

टिप्पणियाँ