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सोची तँ कष्ट सेहो सब तरहे कष्टे नहि होइत अछि।
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कच्ची सड़क पर रेस संँ साइकिल हँकबाक रोमांस की होइ छैक से जे कयने अछि तकरे टा बूझल छैक।
बरारी सँ तिलकामांँझी जाइत काल लालकोठी सँ सुन्दरवन,आनन्द गढ़ धरिक बाट !
खांँखी हाफ़पैंट-नील हाफसर्ट,खुजले पयर वला पिंडस्याम छौंड़ाक पक्की छोड़ि क’ कातक सुर्खी वला पतरकी बाट पर हाफ़ पाइड्ल साइकिल चलबैत कालक सुर्र-सुर्र बजैत मेंही मीठ संगीत की होइ छैक से दिव्य स्वाद,चिक्कन कंक्रीटक सड़क पर चलनहार कें कत’ सँ भेटतनि !
…ओना,विकास इत्यादि अपना जगह पर।
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
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