सत्य ओ मिथ्या
मिथ्या कें हरदम चाही चलबा लय ककरो मदति जरूर,
सत्य ठाढ़ रहि क’ एकसरे चलैत जाइए कोसक कोस।
° गंगेश गुंजन #उचिवक्ता डेस्क.
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