😔| मोटायल म’न !
मनुष्यक मोन ओकर अपने बेहिसाब मनोरथ सँ मोटा जाइत छैक। एही तर्क सँ लगैए जे देह जकाँ मोटाइत मोटाइत मन कें सेहो धोधि भ’ जाइत होइक तँ कोन आश्चर्य !
ओना बहुत खास तँ शरीर विज्ञानी, कविराज वा डॉक्टर कहत। हम म'नक मादे कहलौं। 🦠😝🦠
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
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