🍂 ...प्रेसक मकान छी.
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मानल कलम संगे हम बहुते पुरान छी
लेखक छी भाषाक न बनियाँ-दोकान छी।
देखै छी ऐ जुग मे लीखैत-पढ़ैत जे
की पोथी ने पतरा,प्रेसक मकान छी।
बदलैत वेग सँ बड़ गामो सकल समाज
नवभवन,सड़क-कातक पुरना दलान छी।
सब वैह-वैह लिखि क’ संस्कृति-गौरव-गीत
चाही कहय ई दुनिया कवि हम महान् छी।
मानल न ओते सकलौं कहबाक छै जते
तें ई नहिं जे लेखक हम बइमान छी।
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
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