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चारिए-पांँच दिन पूर्व फेसबुक पर एक टा पोस्ट आयल रहय। तकर उत्तर कथा सेहो घटित भेलैक। ई पोस्ट सैह।अवगत भेल जाउ :
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गंगेश गुंजन लिखलखिन जे-
-कविता बुढ़ा गेल।’
-कविये किएक वक्ता,किछु व्याख्यानदाता से हो।’ वरिष्ठ आलोचक डॉ रामानन्द झा ‘रमण’ तत्काल अपन टिप्पणी कयलखिन।
-अइ मे आलोचक कें किएक छोड़ि देलिअनि डा.रमण जी?’ तड़ातड़ डा.रमण सँ कवि सारंग कुमार आ रमण कुमार सिंह पुछलखिन।
रमण जी केँ आलोचक लीखब बिसरि गेलनि वा जानि-बूझि क’ लिखबे अन्ठा देलखिन? सुनैत छी जे आब किछु नवतूर लेखक सब ऐ तथ्यक अनुसंधान मे भीड़ि गेलय। मैथिली साहित्य प्रेमी समाज मे आतुरता सँ परिणामक प्रतीक्षा कयल जा रहल अछि।
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
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