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जीवन : भरिया !
मनुष्य जीवनक अवरोही आयु-काल,
कान्ह पर खाली सीक-पटइ रखने चलि जा रहल घुरती कालक भरिया जकाँ होइत छैक। •
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
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