किछु बुद्धिजीवी अभिजन !

💥
         किछु बुद्धिजीवी अभिजन ! 
                       🌜🌛
सुनै छी जे गाम मे काल्हि भोरे-भोर चाह- चौबट्टी दोकान पर न'व बुद्धिजीविक दू टा गुट मे भिड़न्त भ’ गेलै। कहांँदन परिस्थिति ई जे आब चलत लाठी-फट्ठा तब उठत फरसा गड़ांँस। विषय ज्वलंत छल। एखनुक जे देशक अंतरराष्ट्रीय तनातनी अछि। 
  एक गुटक रोष छल जे अमुक महिला पत्रकार कें देशद्रोहक अपराध मे तत्काल गिरफ्तार किएक ने क’रहल अछि सरकार?’
   दोसर गुटक कहब रहनि जे -
‘सरकारक कोनो बेठीक खराप निर्णयक आलोचना वा विरोध करब तँ हमरा सभक लोकतांत्रिक अधिकार थिक। तँ से कहि देब महिला पत्रकारक अपराध कोना भ’ गेलै ई ? आखिर हमरा सब लोकतंत्र मे रहि रहल छी कि राजतंत्र में?’
  आब ऐ पर जे बातक अन्हर-बिहाड़ि उठल से अटल बिहारी वाजपेयी जी सँ ल’ क’ श्रीमती इन्दिरा गांधी जी धरिक कांँग्रेस-भाजपा इतिहासक प्रज्वलित प्रसंग कें उद्धृत करैत क्रमशः उक्टा पैंची संँ बहुते आगाँ बढ़ि चुकलै …
  ओही ठाम पाछू दिस कात मे एक ज’न- बोनिहार एक टा बूढ़ लोक बैसल शान्त किन्तु चिन्ता मे सब टा सुनैत रहथि। आब जखन मारा-पीटिक लक्षण बुझयलनि तँ मात्सर्ज भेलनि। सब बच्चा त गामेक है। उठला आ’ ओइ मे सब सँ उग्र युवक कें बांँहि छूऐत कहलखिन-
 ‘की भेलैए बौआ ? सब गोटय तँ अपने गामक ।क'थी लय अहांँ यौर मे ई कोन बातक एना तनातनी हय ?’ 
  युवक बूढ़ा कें आग्नेय आँखिए देखैत धिक्कारैत कंठ सँ कहलखिन -देश मे की भ’ रहल छै अहाँ के बुझलो ने अछि बुढ़ा ?’
‘नै बौआ ! तें ने पूछलौं। के सरकार के आ की पुछलखिनहें जे एते झगड़ा भेल है ?’ बुढ़ा निरीह कंठे कहलखिन।’
                             °°
    यथार्थ यैह अछि। 
जन साधारण लोक - जनता आ राष्ट्रधर्म एवं जाग्रत विपक्षक अभिमानी कार्यकर्ता मे बुद्धिजीवी वर्गक बीच मे एतेक दूरी अछि। एते फाँक छैक। देश प्रेम सं ल क' विपक्षक धर्मक काज, सब टा प्रबुद्धे वर्ग में भ’ रहल छैक। गाम घरक साधारण लोक के तकर कोनो ज्ञाने नहिं।
                       🔥🔥
                    गंगेश गुंजन 
                 #उचितवक्ताडे.

टिप्पणियाँ