🏜️ मैथिली साहित्यमे आएल
लेखकक स्वमार्केटिंग !
विशेष ध्यान दै योग्य किछु शब्दावली मे भाषा :
कोनो प्रकाशकक नहिं, रचनाकार लेखकक
जेना-
१.विमोचनक पश्चाति कनियें कालक भीतरे
पुस्तक छूहि उड़िया गेल।
२…महालोचक हमर पोथी पर तीस पेजक
अपन सुचिन्तित सुदीर्घ लेख मे लीखैत छथि…
३….महाकवि तँ हाथ मे लीतहिं कहि उठलाह : अहाँ,अपूर्व! एहि कोटिक पुस्तक तँ आइ सँ पूर्व कहियो नै देखल।
आब मांँ मैथिली ज्ञानपीठ पुरस्कार संँ वंचित नहिं रहतीह। ईहो गौरव चौखटि धरि आबि क’ रहत। अभिनन्दन कवि।
४.
‘मैथिली के कतेको दशक सँ जाहि ऐतिहासिक मूल्य कृतिक आतुर प्रतीक्षा छलैक से पुस्तक आइ आबि गेल।हमरा लोकनिक परम सौभाग्य। समकालीन विश्व साहित्य मे ई अपन अद्वितीय परिचिति बनाओत तथा पुस्तक अवश्ये माईल स्टोन बनत।’-मैथिलीक उपन्यास सम्राट.
५.ई पोथी मांँ मैथिली कें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करबाक शाश्वत साहित्यक समस्त गुण संँ समृद्ध अछि। साधुवाद महाकवि!
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
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