🌵। कवि: नऽव-पुरान ।🌵
एक टा सद्य: कोपड़ कवि मैथिलीक सुसिद्ध प्रसिद्ध कवि कें जिज्ञासा सँ पुलखिन -
‘सर कवि-कर्म की ?’
‘कविता दरड़ब !’ जरदगब सुसिद्ध प्रसिद्ध कवि वेद-गंभीर कँठस्वर मे कहलखिन।
‘आलोचना कर्म सर ?'कोपड़ कवि पुछलखिन
‘कविता खरड़ब।’ सुसिद्ध प्रसिद्ध कवि उत्तर दैत कहलखिन।
’अर्थात् सर ? नै बुझि सकलिऐ।’ कोपड़ कवि आतुर-व्याकुल ज्ञानाकाँक्षा मे पुछलखिन।
‘कविता दरड़ब आ आलोचना खरड़ब! कहलौं तँ।’ सुसिद्ध प्रसिद्ध वयोवृद्ध कवि जी कोपड़ कवि कें बुझबैत कहलखिन।आ तत्काल पत्रा उन्टाब’ लगलाह। जेना ओइ कोपड़ कविक भवितव्य देख’ लेल राशि लग्नक अनुसन्धान आदि मे व्यस्त भ’ गेलाह
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[खौंझाइ ने तमसाइ लय : हँसै आ बिहुँसय लय]
गंगेश गुंजन#उचितवक्ताडे.
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