दु:ख काल मे भाषा

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                        दु:ख काल मे भाषा !
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प्रशस्त नाटककार कुणाल अपन हालिया ‘साइटिका महाकष्ट’ पर हृदयस्पर्शी फेसबुक पोस्ट लिखलखिन। प्राथमिक औखद बारी कयलनि। डाक्टर सँ समय सेहो लेलनि।अपना सभक एतेक लोकप्रिय लोक छथि।स्वाभाविके जे पोस्ट पढ़ि-पढ़ि क’ ताबड़तोड़ फेबु-मित्रक सहानुभूति,शुभकामना पोस्ट भेट’ लगलनि।
रहिका सँ कवि ‘विनोद’ जी मोबाइल फ़ोन पर अपन शुभकामना देलखिनहें। कहलखिन-
‘भगवान अहाँकें शीघ्र स्वस्थ्य करथिसे भगवती सँ हमर प्रार्थना। शुभकामना।’
  फ़ोन स्पीकर पर रहनि। ( कुणाल जी फ़ोन कें स्पीकर पर किएक रखने रहथि,से एखन लोक के ज्ञात नै) आ कि ओतहि संगे बैसल कुणाल जीक एक टा वैचारिक सखा विनोद जीक सम्वेदना पर त्वरित टिप्पणी कयलखिन -
‘भगवान तँ अपने कते दिन संँ सिक लीव मे छथि। ओ बेचारे अपने बेमार। की करथिन? जे कर’ पड़तनि से अपने।ओहिनो ऐ कष्ट मे कुणाल कें परामर्शक मित्र-लाभ केर बर्खा भइये रहल छनि। समाजे स'ब थीक। कवि-कलाकार लोक कें ईहो कोनो कम भाग्य नहिं छैक ! बुझी तँ डॉक्टरो दवाइ संँ बेसी।’ 
 आब ई बात स्वाभाविके जे दोसर दिसि कवि विनोदक कान मे पड़बे कयलनि।क्रोधित होइत कहलखिन ‘ई केहन अनीश्वरवादी मित्र रखने छी कुणाल अहूँ ?’ बेचारे कुणाल देहक दुख बिसरि क’ क्रमश: मित्र आ विनोद जीक क्रोध सम्हार’ मे अपस्यांत...। ओ तंँ रच्छ रहल जे एही बीच फेसबुक पर एक टा आत्मीय लिखि पठौलखिन-
‘हम अहांँक ख़बरि ले’ब कुणाल।’
   ई तेसरे विपत्ति।आब सुनै छी जे ऐ पोस्ट पर कुणाल कें एक टा परम प्रिय शिष्य लगातार हुनका उसका रहल छथिन : 
‘सर ..ख़बरि लेब’ तंँ  हिन्दीक पुरान मोहबरा छियै। एकर अर्थ सेहो खरापे-’चेतबै’ वला छैक ने। केहन अलच्छ अपैत लोक छथि ई?  मातृभाषा मैथिली मे नहिं सुझलनि किछु हिनका ? कहू अपने एते कष्ट मे छी आ ई महानुभाव कहि रहल छथि जे अपनेक ‘खबरि लेता? ई तंँ उचित नहिं। हम तँ हड़कबै छिअनि हिनका।’ 
‘हाँ-हाँ ई जुनि करू!’ कुणाल शिष्य कें कहुना क' रोकलनि।
एकहि संगे ‘अलच्छ अपैत’क प्रयोग! 
    एतेक कष्टो मे कुणाल कें बेसम्हार हँसी
 लागि गेलनि। 
   आब साइटिका प्रकारक देह व्याधि यथा स्लिपडिस्क आदिओ मे हंँसी छुटब वा छिक्का हयब तंँ छनभरि लय रोगीक प्राण ल’लैत छैक। मुदा से तँ,जनिका बूझल छनि सैह जनैत छथि। 
                    हाय रे मातृभाषाप्रेम !
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[खौंझाइ ने तमसाइ लय:हँसैलय-बिहुँसय लय]
      ‌                गंगेश गुंजन                                     #उचितवक्ताडेस्क.

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