आदति- आदति

🙏🙏             आदति- आदति 
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        एक टा परम सदाचारी भंँगपीबा कवि बहुत गर्व संँ ई कहि क’ ओइ गोष्ठी कें विचारोत्तेजक बना देलखिन जे -
‘ दारूक गिलास सँ तँ हजार कच्छे नीक जे हमर हाथ केँ कलमक आदति लागल छैक।’ 
‘…किन्तु जकरा छै,से सब तँ अहाँक ऐ बात पर हँऽसत आ मूर्खे चपाट कहत !’ 
   प्रतिवाद करैत उपस्थित दोसर परम विशिष्ट प्रबुद्ध कवि हुनको संँ बेसी गौरव सँ प्रखर विरोधक अपन स्वर कटाक्ष कें विनोद संँ छौंकैत ठाँहि पर ठाँइ कहलखिन।कहलखिन की,सोझे चेता देलखिन :
     उपस्थित सहज बुद्धि निरीह श्रोतागण स्तब्ध एक-दोसराक मुंँह तकैत…
                    -ई की भ’ गेलै...
                          😎💢🤓
(तमसाइ ने खौंझाइ लय: हंँसै लय बिहुंँसय लय)
                          गंगेश गुंजन
                        #उचितवक्ताडे.

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