📕। ।। एक ।।
मोहक यतबा रहत इलाका सुख-दुःखो ओतबे भोगब,
भरि गामक ममता राखब तँ चऽलहु पऽड़त सौंसे गाम।
।। दू ।।
रस्ता तँ बड़दिव देखबै छथि बेस चैन सँ जीयैक बाट,
सबटा मगर जाइ छै सब सम्बंधिएक सारा पर द’ क'।
💢
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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