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विश्व-कविता दिवस दिन
अकच्छ कवि दास !
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ठीके अकच्छ भ’ क’ कखनो काल आब तंँ होइए जे जीवन मे हमर प्रिय समाधान प्रसाद सन समस्या मित्र-लाभ भगवान ककरो नहिं देथुन।
चाहो ने पीने रही छनाइत कालक सुगंधिए टा नाक मे पैसि रहल छलय कि फ़ोन आयल।
कहांँ सँ किछु कुशलो-क्षेमक शिष्टाचार देखौताह सोझे गोली दगलनि :
“कवि जी,ऐ बर्ष ‘विश्व कविता दिवस’ पर मैथिली मे कतेक कविता कुथाएल कहू तँ। एक्टिविस्ट कवि ऑर्गनाइजेशन सूची जारी कयलनिहें वा नहिं ?आ कि मैथिलीक विशाल आतुर पाठक कें एखनहुँ प्रतीक्षे छैक? हमरा तंँ नहिं अभरलय!’’
सुनितहिं क्रोधे मन तँ माहुर भ’ गेल कहलिअनि-
‘महराज धन्ये छी अहूँ समाधान बाबू। ई विषय हमरा कोना पता रहत ? जँ हमरा पर व्यंग्य वाण चलौने होइ तँ अगिला विश्व कविता दिवस धरि लय बुझि राखू जे हम स्वयं अरबद्धि क' ओइ दिन कोनो कविता लिखैए लय कविता नहिं लिखै छी। कृपया ध्यानार्थ।
ओना ई बूझै लय एतेक आतुर छी तँ सुनू- एही सब मैथिली विषयक चिन्ता मे अहर्निश
स्वयं कें गलबैत रहै वला एकल व्यक्ति स्रोत ‘मैथिली दधीचि कोलकाता,व्यूरो' सँ सोझे सम्पर्क साधू। सम्पूर्ण सर्वे रिपोर्ट उपलब्ध भ' जायत। अगुताइ मे ओ खट द फोन काटि लेलनि।'
...परन्तु सत्ये कहैत छी,जीवन मे पहिल बेर हम समाधान प्रसाद सन मित्र कें एना झझकि क’ कहने हेबनि….
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गंगैश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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