🌱🌱 किछु स्वतंत्र दूपंतिया
(१.)
ख़ुशीक बात रहैक हमहूंँ बहुत हँसलौं
घ’र मे आबि क’ भरि राति नुका क’ कनलौं।
(२.)
जे जीवन उपहार जकाँ अबैत छैक
से मनुष्य कें कर्जा सधबै जकाँ बीतैत छैक।
(३.)
जिनगीओ ई चमत्कारे अछि
जीति क’ अबैए,हारि क’ जाइत अछि.
🌸🌸🌸
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडे.
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