बैसल बनिया लेखकक दुर्दिन

🌼   बैसल बनिया लेखकक दुर्गति  !
                 ( विनोद वार्ता )
       एक ठाम समाचार पढ़लिऐक जे- ‘छिड़ियाएल मोतीक लोकार्पण’ भेलै। लोकार्पण तं पोथीत्यादिएक संभव। मोतीक लोकार्पण तँ प्रथमहि सुनि रहल छी। तखने सँ सोचने जा रहल छी,सोचने जे आख़िर से भे’ल कोना हेतैक- ‘छिड़ियाएल मोतीक लोकार्पण ?
की,प्रधान अतिथि पहिने सब टा मोती के बिछने हेथिन,तखन ‘लोकार्पण कयने हेथिन? महाशय बेचारे जे रहल होइथ, बीछैत बीछैत डांँड़ो ने सकसिया गेल होइनि।’
   एतबा कहब छल कि एक टा उत्तम साहित्य समाचार जागरूक युवक टोकलखिन-
‘अपने सेहो धन्ये छियै सर। समाचार पढ़लिऐ आ ताही में ई नै पढ़ाएल जे ‘छिड़ियाएल मोती’ पुस्तकक नाम छैक?’              📕
     स्वागत आ बधाइ प्रोफ़ेसर विभा !
                        सदर्भ :
       (प्रो.विभा कुमारीक एक पोस्ट।)
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                     गंगेश गुंजन                                   #उचितवक्ताडेस्क.

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