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अभिधा मे व्यञ्जना साधि लेबाक सामर्थ्ये सम्प्रेषण मे ओइ लेखकक
आत्म निर्भर भ' जायब भेल।कवि सैह साधै मे जिनगी लगा दैए।
सफल-असफल होएबाक विषय तं फूट अछि।
हमरे बूझल अछि जे भरि संसार पजरल अछि आ हम अभिधा-लक्षणों क' रहल छी-किएक.... !
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
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