📕 देह-घर !
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जखन कि बड़का बड़का लेखक-विद्वान- प्रोफ़ेसर बुतें अपना टू बेडरूम थ्री-फोर बेडरूम घर मे हजार दू हजार पोथी राखब पार नहिं लागि रहल छनि तथा राखि देबा लय कोनो ने कोनो सरकारी वा अकादेमी पुस्तकालय तकैत रहैत छथि एहन विकाल मे मनुष्यक एतनी टाक साधारण- देह। भरि ब्रह्माण्ड ज्ञान कें कलम जकांँ जेबी मे खोंसने रहैए। सब अंग-अनुशासन-प्रशासनक अनुपम कौशल सँ सैंति क’ रखने चलैत रहैए -
देह-घर !
अद्भुत अछि !
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गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क.
(ऐ मे कोनो दार्शनिक,आध्यात्मिक पोस्टक भ्रम नहिं कयल जाय।अनन्य स्रैष्टिक सौंन्दर्य ओ सम्भावनाक सचल मूर्ति रूप, कहबाक ‘बैठे ठाले’-चेष्टा मात्र थिक हमर ई विशुद्ध संसारी भौतिक कथन।#उवडे).
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