दू पंतिया : ने हमर दुनियें ओहन...

ने हमर दुनियें तेहन अछि आब अपनो ओहन नै छी।
ऐ युग मे कमला कातक से लोक कहाँ बांँचल भेटत !
                       🪾🪾 
                    गंगेश गुंजन
                #उचितवक्ताडेस्क.

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