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फेसबुक नारक काल।

हमरा सबहक सुख !

सुखक खबास नहिं : दुःखक स्वामी

लेखक आन नहिं,खास अपने सन होइछ।

.लेखक ककरो सन नहिं,अपनहिं सन रहैए।