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बाटक मुखड़ा: जीवनी

वाचाल शहरक बौक लोक सब !

सम्प्रति मैथिली मेघ दिसि ताकैए

राखय नहिं अबैत छैक मनुष्य केँ

अचार जकाँ, पथार जकाँ नहिं ...